Thursday, 25 December 2014

सराहनीय फैसला

स्वास्थ्य बीमा के नवीकरण के बारे में दिल्ली हाई कोर्ट का ताज़ा फैसला सराहनीय है। वास्तव में बीमा का दूसरा नाम ही जोखिम है। एक तरफ ग्राहक भविष्य के लिए बीमा करवाता है तो बीमा कंपनियां उस जोखिम की क्षतिपूर्ति का ज़िम्मा उठाती है। बीमा कंपनियां यदि क्लेम नहीं देती और बीमा का नवीकरण नहीं करती तो धीरे धीरे जनता का विश्वास उनसे उठ जाएगा। यह स्थिति मेडिक्लेम के अलावा वाहन बीमा क्षेत्र में भी है। पुराने वाहनों का बीमा तो लगभग बंद ही हो गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का संकेत स्पष्ट है। यह सरकार को साफ़ बताता है कि कंपनियों पर लगाम कसना ज़रूरी है। बेलगाम बीमा कंपनियां यदि जीवन बीमा क्षेत्र में भी ऐसा व्यवहार करने लगें तो बेचारी जनता कहां जायेगी?


(यह पत्र नवभारत टाइम्स के 27 जनवरी 2005 अंक में प्रकाशित हुआ।)