Saturday, 20 December 2014

हिंदी का अपमान

मैगसायसाय अवार्ड विजेता राजेंद्र सिंह ने प्रवासी भारतीय सम्मलेन में हिंदी में भाषण देकर देश और भाषा को सम्मान दिया, लेकिन उनके भाषण पर आपत्ति करने वालों से पित्रोदा की माफ़ी ने इस सम्मान को अपमान में बदल दिया। जहां विश्व के दूसरे देशों में राष्ट्रीय भाषा में बात करना सम्मान की बात है, वहीँ भारत में शायद यह अपमान का विषय है। इसी सम्मलेन में प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने अनिवासी भारतीयों को दोहरी नागरिकता देने की घोषणा की थी। इस फैसले की समीक्षा होनी चाहिए। आंख मूंद कर सभी एनआरआई को दोहरी नागरिकता नहीं देनी चाहिए। जो एनआरआई किसी भारतीय भाषा में बात करना अपना अपमान समझते हैं, उन्हें दोहरी नागरिकता का लाभ कैसे दिया जा सकता है? सरकार को चाहिए कि दोहरी नागरिक्ता के इच्छुक एनआरआई के सामने शर्त रखे कि उनके लिए किसी एक भारतीय भाषा का ज्ञान अनिवार्य होगा।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स 17 जनवरी 2015 में प्रकाशित हुआ।)