Thursday, 18 December 2014

आयकर का शिकंजा

4 दिसंबर को प्रकाशित संपादकीय 'आयकर का शिकंजा' में ठीक ही कहा गया है कि सरकार कंप्यूटरीकरण से पैन के जरिये कई खर्चो और सेविंग्स के स्रोत्रों का पता लगा लेगी, जिससे आयकर की चोरी मुश्किल हो जायेगी। अच्छा होता कि सरकार विभिन्न करों की चोरी की मानसिकता को समझे कि काला धन क्यों इकट्ठा होता है। दरअसल अधिक टैक्स रेट और जटिल नियमों के कारण भी काला धन इकट्ठा होता है। आय कर से पहले एक्साइज, सर्विस और सेल्स टैक्स भी काले धन की उपज में मुख्य भूमिका निभाते हैं। आयकर उस प्रक्रिया का एक अंग है। ये सारे कर बहुत जटिल हैं। सरलीकरण के नाम पर हर साल इनमें संशोधन किया जाता है पर उससे कानूनी प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाती है। सरकार को चाहिए कि वह टैक्स रेट कम करे और नियमों को सरल बनाये।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स, 23 दिसंबर 2004 में प्रकाशित हुआ।)