Saturday, 22 November 2014

मुंबई में चीतों का खौंफ

सरित प्रवाह के अंतर्गत संपादकीय टिप्पणी मुंबई में चीतों का खौंफपढी। यह कहना सत्य है कि मानव में अधिक लालच की मनोवृति होने के कारण जंगलों का शहरीकरण हो रहा है जिस से मुंबई के चीते अपने आप को जंगल के स्थान पर शहर के बीचोंबीच पाते हैं। उचित होता कि जंगलों को काट कर शहरों के विस्तारीकरण के साथ चीतों को किसी दूसरे वनों में शिफ्ट कर दिया जाता।
यह हो सकता है कि मनोरंजन हेतु जंगल का कुछ हिस्सा शहर के बीच छोड दिया हो जोकि घातक है। सरकार को चाहिए कि वनों के पास शहरों को न बसने दें। मानव को एडवेंचर पसंद है परन्तु यह आम जनजीवन के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।

(यह पत्र सरिता, सितंबर (द्वितीय) 2004 अंक में प्रकाशित हुआ)