Saturday, 22 November 2014

कालिजों में प्रवेश की समस्या

संपादकीय में कालिजों में प्रवेश की समस्याटिप्पणी पढी। यह सही है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिजों में प्रवेश के लिए 90 प्रतिशत अंक भी कम हो जाते हैं और छात्रें को बाहर जाना पड रहा है। एक तरफ बाहर के छात्र दिल्ली आ रहै हैं तो दूसरी तरफ दिल्ली के छात्रों को मजबूरी में बाहर जाना पड रहा है।

30 साल पहले जहां दिल्ली विश्वविद्यालय में 40-50 प्रतिशत अंकों पर प्रवेश मिल जाता था, अब वहीं उस से दोगुने अंक भी कम पड रहे हैं। यह देख कर तो यही लगता है कि प्रवेश के लिए अंकों का महत्व ही समाप्त होता जा रहा है।
दिल्ली के आसपास के शहरों, गुडगांव, नोएडा का विकास तो हो रहा है पर यहां कालिज बनाने के लिए कोई विशेष प्रयास नही हो रहे हैं। दिल्ली सरकार का भी इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं है।
मैं आप के विचारों से सहमत हूं कि छात्रों की मेहनत और अंकों के महत्व को ध्यान में रखते हुए कालिजों की नई ब्राचें खोलने और अधिक सीटों की अनुमति देनी चाहिए ताकि छात्र हतोत्साहित न हों। छात्रों के भविष्य को सुधारने के लिए सरकार और यूजीसी को विशेष कदम उठाने चाहिए।


(यह पत्र सरिता, अक्तूबर (प्रथम) 2004 अंक में प्रकाशित हुआ)