Thursday, 23 October 2014

जयललिता का प्रायश्चित

सरित प्रवाह के अंतर्गत संपादकीय टिप्पणी 'जयललिता का प्रायश्चित' बिलकुल सटीक है। चुनावों में हारने के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का फैसला देर से सही, लेकिन दुरुस्त है। जयललिता का यह प्रायश्चित दूसरे नेताऔं को शायद मार्गदर्शन दे कि सत्ता में आने के बाद नेताऔं का सिर्फ एक ही कर्तव्य होता है, जनहित में कार्य करना।
तमिलनाडु में पिछले कई वर्षो से निजी सवार्थों और विरोध दमन की नीति चल रही है, इस में जयललिता और करूणानिधि दोनों शामिल हैं। जनता चाहे तमिलनाडु की हो या पंजाब की, निर्णय एक ही देती है कि उसे केवल जनहित के कार्य पसंद हैं। इसीलिए दोनों राज्यों की जनता ने जयललिता और अर्मिंदर सिंह को पटखनी दी।


(यह पत्र सरिता अगस्त प्रथम, 2004 में प्रकाशित हुआ)