Friday, 12 September 2014

निजी क्षेत्र में आरक्षण


कांग्रेस ने सरकार गठन के बाद निजी क्षेत्र में आरक्षण का मुद्दा छेड दिया है, जो सिर्फ राजनीति से प्रेरित लगता है। पिछले पांच दशकों में सरकारी नौकरी का प्रलोभन और आरक्षण दलितों को देश की मुख्यधारा में नहीं जोड सका। इसका मुख्य दोष कांग्रेस का ही है। कांग्रेस को वोट बैंक के लिए एक मुद्दा चाहिए, क्योंकि सरकारी संस्थान एक के बाद एक बंद होते जा रहे हैं और सरकारी नौकरियों का अकाल पड गया है। लेकिन सरकार को निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने से पहले यह सोचना चाहिए कि वे इसको किस तरह से प्रभावशाली बनाएगी क्योंकि अब निजी क्षेत्र सिर्फ हायर और फायर में विश्वास करता है। यानी आरक्षण के बल पर नौकरी पाने के अगले दिन फायर भी किया जा सकता है। ऐसे आरक्षण का क्या फायदा। यह तो सिर्फ पैसे और समय की बर्बादी ही है।


(यह पत्र 29 जून 2004 को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ।)