Sunday, 17 August 2014

नमाज के लिए छुट्टी

संपादकीय टिप्पणी नमाज के लिए छुट्टीसराहनीय है। देश में आज हर राजनीतिक पार्टी किसी न किसी धर्म या समुदाय से जुडी है। दूसरों पर दोष लगाने से पहले कोई पार्टी यह नही सोचती कि उस का अपना अस्तित्व भी धर्म से जुडा है। यह दुख का विषय है कि धर्म और राजनीति सिक्के के दो पहलू बन गए हैं, जिन्हें अब अलग करना मुश्किल लग रहा है। सार्वजनिक छुट्टियों को कम करने के बजाए हम इसमें इजाफा करने के उपाय सोचते हैं, सिर्फ अपने फायदे के लिए, जो एकदम अनुचित है।


(यह पत्र सरिता मई (प्रथम) 2004 में प्रकाशित हुआ।)