Sunday, 17 August 2014

दुर्भाग्यपूर्ण फैसला

निजी बिजली कंपनियों को बिजली चोरी रोकने के लिए अतिरिक्त अधिकार देना दुर्भाग्यपूर्ण है। दिल्ली सरकार के इस फैसले से उपभोक्ताओ को करारा झटका लगा है। एक बिजली कंपनी के अधिकारियों को शिकायतकर्ता, दरोगा, मजिस्ट्रेट सब कुछ बना देना एकदम गलत है। उपभोकता तेज चलते बिजली के मीटर और ज्यादा बिलिंग से पहले ही परेशान हैं। आज की तारीख में इसकी कोई सुनवाई नही हो रही है। गौर किया जाए कि ऑटो रिक्शा चालकों और बिजली कंपनियों में कोई अंतर नही है। जितना मांगेगे, उतना देना ही पडेगा। बिजली की चोरी पहले भी होती थी, क्योंकि झुग्गियों अनधिकृत बस्तियों को नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। निजी बिजली कंपनियों ने इस समस्या से निपटने के लिए रेट बढाने और ज्यादा बिलिंग का रास्ता चुना। जब तक नेताओं का बिजली चोरों को संरक्षण मिलता रहेगा, आम उपभोक्ता परेशान रहेगा।


(यह पत्र 17 मई 2004 को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ।)