Saturday, 9 August 2014

चुनाव में अपराधी

पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि कैदियों को चुनाव लडना चाहिए या नही। हमें इसे नैतिक संदर्भों में देखना चाहिए। कानून के तहत कोई जोडतोड अवश्य निकल आएगा, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों को अपनी छवि सुधारने का अवसर दिया है। हर दल को ऐसे व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए जो सलाखों के पीछे है। इससे दलों की छवि भी सुधरेगी तथा राजनीति में स्वच्छता आएगी। यह देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है। आज हर दल इस विषय पर चुप है, क्योंकि प्राय: हर किसी के तार किसी न किसी रूप में असामाजिक तत्वों से जुडे हैं। नैतिक मूल्यों का इतना पतन हो गया है कि आम व्यक्ति की नजर में हर दल संदिग्ध है। इसलिए यह जरूरी है कि पार्टियां अपराधियों को चुनावों से दूर रखने के लिए पहल करें।


(यह पत्र 8 मई 2004 को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ।)