Saturday, 19 July 2014

शेयर बाजार का सच

पिछले कुछ वर्षों से शेयर बाजार की कार्यप्रणाली पर सरकार का कोई नियंत्रण नही रहा है। सेबी ने कई नियम बनाए, लेकिन इसकी कार्यशैली में पारदर्शिता नही ला सकी। इसी कारण सरकार को चूना लगाने में कोई घबराता नही है। इन्ही कारणों से सूचकांक में उतार-चढाव काफी तेजी से हो रहा है। इसके पीछे कोई ठोस आधार नही है। मात्र हवा के रूख पर ही सूचकांक पलटी खा जाता है। किसी कंपनी के शेयर रेट उसके लाभ और कार्यप्रणाली पर आधारित होने चाहिए, जबकि अघिकांश शेयर का कंपनी के वास्तविक लाभ से कोई संबंध नही होता। दरअसल शेयर बाजार कुछ विशेष लोगों के नियंत्रण में रह गया है। लघु निवेशक आज भी इसकी कार्यशैली को नही जान सके हैं। इसकी कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सरकार को पहल करनी होगी।


(यह पत्र 23 मार्च 2004 को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ।)