Sunday, 13 July 2014

अंग्रेजी की पैरवी

सरित प्रवाह में अंग्रेजी की पैरवीपर ऐप के विचार सटीक है। वास्तव में इस के पीछे 2 कारण हैं।
पहला, सरकारी स्कूलों में शिक्षा का गिरता स्तर। सरकार और अध्यापकों समेत किसी को अच्छी शिक्षा देने के लिए जनता मजबूर नही कर सकती। सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की छात्रों के प्रति कोई जिम्मेदारी नही है, भले ही सारे छात्र फेल हो जाए।
दूसरा, सरकार द्वारा शिक्षा के निजीकरण को बढावा देना। इस के तहत प्राइवेट स्कूलों की बाढ सी आ गई है। इन 2 कारणों से ही जनता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए प्राइवेट स्कूलों की ओर देख रही है, जिन में सरकारी स्कूलों से बेहतर शिक्षा का स्तर है।
हांलाकि प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी जाती है लेकिन ज्यादातर छात्र अंग्रेजी समझ तो लेते हैं, लेकिन बोल नही पाते। इसी कारण हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के चैनल और फिल्में अधिक लोकप्रिय हैं, क्योंकि देश के कण कण में मातृभाषा हिंदी ही समाई हुई है।
अंग्रेजी को पढना, समझना अच्छी बात है, लेकिन जबरदस्ती लादने में बुराई है, जिसका नतीजा यह है कि व्यवहार की भाषा आज भी हिंदी है। सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी को बढावा दिया जाता है।


(यह पत्र सरिता मार्च (प्रथम) 2004 में प्रकाशित हुआ।)