Saturday, 7 June 2014

फर्जी स्टांप घोटाला

लेख फर्जी स्टांप घोचालादिसंबर (द्वितीय) 2003 यह दर्शाता है कि स्वार्थी नेताऔं और सरकारी अफसरों की मदद से तेलंगी ने फर्जी स्टांप बेचे और सरकारी राजस्व को अपना निजी राजस्व बनाया क्योंकि घोटालों की जांच कछुए की गति से होती है और नेता आपना बचाव ढूंढ लेते हैं, यही कारण है कि पिछले एक दशक में जो घोटाले हुए हैं उन में किसी को भी सजा नही मिली है।
अब तो कई घोटालों को हम भूल भी चुके हैं। लेकिन सरिता पत्रिका उन की बारबार याद दिलाती रहती है। इसी अंक में दूसरा लेख चारा घोटाला, कहां तक पहुंची जांच एक और भूल चुके घोटाले की याद ताजा करता है।


(यह पत्र सरिता फरवरी (प्रथम) 2004 में प्रकाशित हुआ।)