Saturday, 3 May 2014

लव मैरिज

लव मैरिज विशेषांक के सभी लेख अच्छे रहे। वास्तव में देखा जाए तो लव की सब से ज्यादा जरूरत शादी के बाद पडती है। शादी चाहे लव हो या अरेंड बिना लव के गृहस्थी चल ही नही सकती। पति पत्नी के बीच नौक झौंक, तकरार के साथ प्यार बना रहे तो मैरिज सफल रहती है।

गृहस्थ जीवन सब से कठिन तपस्या है। इस में आपसी समझबूझ, समन्वय जरूरी है। यह सब बिना प्यार के मुश्किल है।
शादी से पहले लव एक शारीरिक आकर्षण है वहीं लव एक मानसिक जरूरत बनती है शादी के बाद।

इसलिए जहां लव के लिए कुछ भी करेगा यानी मैरिज तब मैरिज के बाद लव नहीं तो कुछ भी नही। यदि शादी के बाद प्यार है तो सब समस्याऔं को आसानी से हल किया जा सकता है।


(यह पत्र गृहशोभा अक्तूबर 2003 अंक में प्रकाशित हुआ।)