Saturday, 24 May 2014

विनिवेश

लेख विनिवेश पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसलाअक्तूबर (द्वितीय) सरकार की यह मानसिकता दर्शाता है कि वह सिक्के का एक पहलू देख कर निर्णय करती है। एक समय था कि सरकार निजी क्षेत्र का धडाधड सरकारीकरण करती जा रही थी और आज ठीक उसी का उलटा हो रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला उचित है कि सरकार को अपना होमवर्क सही तरीके से करना चाहिए। हमें एक पहलू और देखना चाहिए कि आज सरकार बजट घाटे को पूरा करने के लिए सरकारी उपक्रमों को बेच रही है लेकिन जब दोचार सालों में ये उपक्रम बिक जाएगें तब बजट घाटे को पूरा करने के लिए सरकार क्या करेगी? यहि न कि नए कर लगाएगी और तब वह बोझ शायद जनता सह न सके।

सरकार चाहे तो इस के लिए अपने मंत्रियों को खर्चे कम करने का आदेश दे सकती है।


(यह पत्र सरिता दिसंबर (प्रथम) 2003 में प्रकाशित हुआ।)