Thursday, 1 May 2014

सरकारी कर्मचारी घरजंवाई की तरह

लेख सर्वोच्च न्यायालय का फैसला : हडतालें अवैधइस सच्चाई को दर्शाता है कि सरकारी कर्मचारी अपने निजी स्वार्थ के लिए जनता की भलाई की अनदेखी कर पूरी तरह से ब्लैकमेल पर उतर आते हैं। जिस जनता के कार्यों को पूरा करने के लिए सरकारी विभाग बनाए जाते हैं और कर्मचारी नियुक्त होते हैं, उन की अनदेखी कर हडतालें की जाती हैं।

देश की अर्थव्यवस्था को बिगाडने के लिए सरकारी कर्मचारी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। इसीलिए अब विभिन्न विभागों और संस्थानों में जरूरत से अधिक कर्मचारियों की भरती बंद करने एवं निकम्मे कर्मचारियों की छंटनी करने में जुट गई है।
सरकारी कर्मचारी घरजंवाई की तरह हैं जो शादी (नौकरी) के बाद ससुराल (जनता) के पैसे पर मौज करते है और रिश्वत भी लेते हैं यानी आम के आम और गुठलियों के दाम। ऐसे हालत में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला उचित है कि सरकारी कर्मचारियों को हडताल का मूल अधिकार नही है। उन का मुख्य ध्येय पूरी तन्मयता के साथ काम करना होना चाहिए और वह भी रिश्वत लिए बिना। उन्हे घरजंवाई का चोला उतार फेंकना चाहिए और कमाऊ पूत की तरह घर के समस्त सदस्यों के लालनपालन एवं उन की जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।



(यह पत्र सरिता अक्तूबर (प्रथम) 2003 अंक में प्रकाशित हुआ।)