Saturday, 22 March 2014

अदालतों का सच

सरित प्रवाह में अदालतों का सचविषय पर आपकी टिप्पणी एकदम सटीक है कि न्यायमूर्ति शमित मुखर्जी प्रकरण पर विपक्ष को सांप सूंघ गया जबकि अन्य किसी मामले में जरा सी बात पर संसद की कारर्वाही तक ठप कर देते हैं।

दरअसल, विपक्ष जजों के खिलाफ आवाज इसलिए नहीं उठा रहा है, क्योंकि जजों को नाराज नही करना चाहता। पता नही कौन सा जज कब काम आ जाए।
सत्ता में आने के बाद अपने विरोधियों को परेशान करने के लिए एक के बाद एक मुकदमेबाजी में यदि जज नारज रहे तो उन्हें खुद परेशानी हो सकती है इसलिए एक चुप सौ सुख।


(यह पत्र सरिता जुलाई (प्रथम) 2003 अंक में प्रकाशित हुआ।)