Saturday, 11 January 2014

पति और पैसा

लेख पति और पैसा(जनवरी, प्रथम) सामयिक है। आधनिक युग में पैसे ने प्रेम और सामाजिक मूल्यों को बहुत पीछे छोड दिया है। गहराई से सोचा जाए, तो पैसा बहुत कुछ है और कुछ भी नही है। पैसा जिन्दगी में एक सा नहीं रहता है। यह घटता बढता है इसलिए अभिभावकों का कर्तव्य है कि बच्चों को उचित शिक्षा दैं कि पैसे का सदुपयोग करें और कम पैसे में भी जीना सीखें। यदि आप को पैसे में जीने की आदत है तो यह भी जान लें कि जीवन के उतारचढाव में, कठिन परिस्थितियों में प्रेम ही काम आएगा, क्योंकि पैसा आई गई चीज है। गृहस्थ जीवन में प्रेम का महत्व पैसे से अधिक है। समझदारी से पैसे का उपयोग प्रेम को अधिक बढता है।

(यह पत्र सरिता के फरवरी (द्वितीय) 2003 अंक में प्रकाशित हुआ।)