Friday, 1 November 2013

राजनीति में यौनाचार


गृहशोभा अक्तूबर, 2002 अंक में लेख राजनीति में यौनाचार से लगा दामन पर दाग सामयिक है। आज राजनीति एक सफल उद्धोग है और हर व्यक्ति उस में सफल होना चाहता है और ऊंचनीच की परवाह किए बिना राजनीति से हटना नही चाहता है। खुद राजनीतिक पार्टियां सुधार नही चाहती हैं। अपनी छवि सुधारने की चिंता किसी पार्टी को नही है।
अभी हाल ही में चुनाव आयोग ने चुनाव सुधार संबंधी कुछ आदेश जारी किए तब सत्ता और विपक्ष की तमाम पार्टियों ने होहल्ला कर कानून ही बदल दिया और कानून अपने पक्ष में कर लिया।
कोई भी पार्टी नही चाहती कि शरीफ लोग राजनीति में प्रवेश करें। इसलिए हमें ही राजनीति से दूर रहना पडेगा वरना कीचड के छीटों व दलदल से बचना मुश्किल है।


(यह पत्र गृहशोभा के दिसंबर 2002 अंक में प्रकाशित हुआ।)