Saturday, 26 October 2013

गाने कैसे कैसे

अक्तूबर (प्रथम) 2002 अंक के स्तंभ गाने कैसे कैसेमें इश्क कमीनागीत पर टिप्पणी पढ कर दुख हुआ कि आप की परिवारिक पत्रिका ने गाली गलौज को गीत के रूप में साधारण स्तर पर लिया है। जहां इश्क पर सुंदर शेर और गजलें लिखी गई हैं वहां उसे कमीना बता कर उस की तौहीन करने के अलावा छोटे बच्चों को पथभ्रष्ट भी किया जा रहा है। हर घर, गली, महल्ले में बच्चे फिल्मी गीत तो गाते हैं पर उसका मतलब नही जानते। गीत के माध्यम से अनजाने में उन के मुख से गाली निकलवाई जा रही है। बेहतर यही होगा कि गीतकार और गायक इस गाली से आगे बढ कर कुछ और गाली के शब्द इस्तेमाल न करे. यह तो गीतकार, संगीतकार, गायक और गायिका का दिमागी दिवालियापन है। इस को रोकना आवश्यक है, चाहे इस गाने के साथ शाहरूख का टपोरी डांस लाजबाव हो या न हो।



(यह पत्र सरिता के नवंबर (द्वितीय) 2002 अंक में प्रकाशित हुआ।)