Friday, 11 October 2013

राजनीतिक स्थिति


लेख नेता और नौकरशाही का गिरता चरित्रसितंबर (द्वितीय) आज की राजनीतिक मनोदशा को दर्शाता है। सत्य तो यह है कि नेताऔ के गिरते चरित्र का मुख्य कारण पद की गरिमा और दौलत की ताकत है जिस के आगे आम जनता बेबस है। आज के समय में राजनीति सब से प्रबल उद्दोग है जिस में पूंजी और श्रम का निवेश नही होता बल्कि छल, झूठ और कपट का निवेश होता है, जिस के माध्यम से कोई भी नेता सफलता के शिखर पर पहुंच सकता है।
इंस्टेड मुनाफे के इस युग में राजनीति ही एकमात्र व्यवसाय है, जहां मानव की समस्त इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। इसीलिए तो यश, ताकत, पैसा और कुरसी की गरिमा के लिए नेताऔं का चरित्रहनन हो चुका है जो कि जनता के लिए चिंता की बात है क्योंकि उस के हर काम में बाधा नेता ही तो डालते हैं।


(यह पत्र सरिता के नवंबर (प्रथम) 2002 अंक में प्रकाशित हुआ।)