Saturday, 28 September 2013

आयकर बनाम राजस्व

लेख आयकर बनाम राजस्व, आम जनता की मुसीबतें बढी(सितंबर/प्रथम) पढा। इस में दिए गए तथ्य व आंकडे चौंकाने वाले हैं। सरकार आयकर कानून को सरल करने के बजाय हर साल पेचीदा करती जा रही है और वेतन भोगियों पर शिकंजा कस रही है क्योंकि उन की पैरवी के लिए कोई नहीं है। व्यापारी वर्ग विभिन्न ऐसोसिएशनों की मार्फत अपना पक्ष वित्तमंत्री के समक्ष रखता है। चूंकि सरकार को चुनावों के लिए धन की जरूरत को व्यापारी वर्ग ही पूरा करता है, इसलिए व्यापारियों के हित में वेतनभोगियों को परेशान किया जाता है।
व्यापारियों को एक तरफ ज्यादा छूट दी जा रही है तो दूसरी तरफ वेतन पर मिलने वाली मानक कटौती पर और अंकुश लगाया जा रहा है। यह परेशानी तब तक जारी रहेगी जब तक भ्रष्टाचार समाप्त नही होता। आज पूरा आयकर विभाग ही भ्रष्ट हो चुका है। अपनी जेबें भरने की फिक्र में सरकार के राजस्व की कौन चिन्ता करता है।

(यह पत्र सरिता के अक्तूबर (द्वितीय) 2002 अंक में प्रकाशित हुआ।)