Sunday, 8 September 2013

आर्थिक घोटालों का नगर मुंबई


अगस्त (द्वितीय) 2002 के अंक में प्रकाशित लेख आर्थिक घोटालों का नगर मुंबईयह दर्शाता है कि जब तक मनुष्य तत्काल कमाई का लालच नहीं छोडेगा तब तक रातोंरात करोडों की दौलत हासिल करने के लिए उलटेसीधे सभी रास्तों को अपनाता ही रहेगा और इस का नतीजा होगा कि घोटाले बढते रहेंगे।

परिश्रम एवं सीधे रास्ते की कमाई से तत्काल दौलत नहीं मिल सकती। दो और दो बीस करने के चक्कर में मनुष्य हर गलत कार्य को करने के लिए तैयार हो जाता है। यही नही, वे गरीब जनता की गाढी कमाई को भी अपने ऐशोआराम के लिए इस्तेमाल करते हैं। जब तक हमारे नेता अपनी छवी सुधारने की कोशिश नहीं करेंगे तब तक जनता भ्रष्ट नेताओं का अनुसरण करती रहेगी और देश में नए घोटाले जन्म लेते रहेगें।


(यह पत्र सरिता के अक्तूबर (प्रथम) 2002 अंक में प्रकाशित हुआ।)